Tuesday, February 16, 2010

कलाई के जादूगर की बाजीगरी

कलात्मकता और आक्रामकता का अनूठा मिश्रण है लक्ष्मण की बल्लेबाज़ी
चंद्रकांत शुक्ला
मंगलवार को ईडन गार्डन में वीवीएस लक्ष्मण ने कलात्मकता से भरी एक और शानदार पारी खेली। इस समय टेस्ट क्रिकेट में भारत के प्रमुख प्रतिद्वंदी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लक्ष्मण के बल्ले से यह शानदार पारी फिर ऐसे समय में निकली, जब टीम को प्रतिष्ठा की लड़ाई में बने रहने के लिए उसकी नितांत आवश्यकता थी। लक्ष्मण की कलात्मक बल्लेबाजी का ही यह कमाल था कि सैकड़ा पूरा होने पर दर्शकों के अलावा दिन भर फील्डिंग करते हुए पसीने से तरबतर अफ्रीकी खिलाड़ी भी तालियां बजाते नजर आए। वर्ना आजकल तो क्रिकेट में ऐसे दृश्य दुर्लभ ही हो गए हैं। लक्ष्मण की इस पारी का महत्व भारतीय ड्रेसिंग रूम के माहौल से भी समझा जा सकता है जहां शतक पूरा होते ही हर खिलाड़ी जोशीले अंदाज में तालियां पीट रहा था। इतना जोश तो भारतीय खेमे में सचिन का शतक पूरा होने पर भी आजकल नहीं दिखता। साथ में बल्लेबाजी कर रहे कप्तान धोनी को ऐसे ही एक मजबूत खम्भे की जरूरत थी जो उनका रन बनाने में भी भरपूर साथ दे सके और लक्ष्मण ने धोनी को निराश नहीं किया। वैसे तो ईडन गार्डन लक्ष्मण को सदा ही रास आता रहा है, किंतु इस पारी के साथ ही उन्होंने एक महत्वपूर्ण रिकार्ड भी अपने नाम कर लिया। लक्ष्मण इस मैदान में एक हजार टेस्ट रन पूरा करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। मैने लक्ष्मण की आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई दो सौ इक्यासी रनों की वह ऐतिहासिक पारी भी देखी थी, आज उस पारी के एक-एक शाट्स मेरे जेहन में उभर रहे थे। लक्ष्मण आज भी अपनी बल्लेबाजी में उतने ही तल्लीन थे। उनकी कलाई में आज भी वैसी ही लोच और लचक मौजूद है जिसके दम पर वे दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों के माथे पर पसीने की बंूदें ही नहीं बल्कि धार निकालने का माद्दा रखते हैं। इसी वजह से उनकी शैली को मैं आक्रामकता भरी कलात्मक बल्लेबाजी का नाम देता हंू। बहरहाल इस मैच की बात करें तो पहली पारी में गेदबाजों के अच्छे प्रदर्शन के बाद बल्लेबाजों ने भी अपने दायित्व का निर्वहन बखूबी कर दिया है और मैच जिताने का जिम्मा फिर गेदबाजों के पाले में डाल दिया है।

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