Wednesday, February 17, 2010

चलो काई तो सोच रहा है दूर की

चन्द्र कान्त शुक्ला

मानव संसाधन मंत्रालय पिछले लम्बे समय से विवादों का पर्याय बन गया था। इस पद को सुशोभित करने वाले सर्वश्री मुरली मनोहर जोशी और श्रीमान अर्जुन सिंह ने सारी ऊर्जा पार्टी का एजेंडा लागू करने में ही लगा दी। दोनों में भगवाकरण और मुस्लिम तुष्टिकरण में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ ही लगी रही। एक भी उल्लेखनीय कार्य दोनों ही नहीं कर पाए। अब यह देखकर अच्छा लग रहा है कि नए मानव संसाधन मंत्री कुछ तो हाथ-पैर मार रहे हैं। बोर्ड परीक्षाओं पर सराहनीय पहल के बाद प्रवेश परीक्षाओं और एक समान पठ्यक्रम पर उनकी पहल यदि सिरे चढ़ती है तो आने वाली पीढ़ियों का कुछ तो भला होगा ही। यदि सिरे चढ़ती है यहां मैं इसलिए कह रहा हूं कि हमारे देश में कुछ अच्छी योजनाएं महज इसलिए लागू नहीं हो पार्इं क्योंकि अनेक राज्यों में दूसरे राजनीतिक दलों की सरकारें होती हैं और सियासी वजहों से उन्हें केंद्र सरकार की हर नीति का विरोध ही करना होता है।

1 comment:

  1. sari tayariya Arjun sindh ji ke samay se chal rahi kametiyo ki riport aa chuki thi ki chunav aa gaye kul mila kar sarthak kaary avm pahal hai sadhuvad

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