संदर्भ-वनडे में सचिन का दोहरा शतक
चन्द्र कान्त शुक्ला
भारत ही क्या अब तो पूरी दुनिया में खुद को क्रिकेट का भगवान साबित कर चुके मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने द. अफ्रीका जैसे मजबूत प्रतिद्वंदी के खिलाफ पचास ओवरों के क्रिकेट में दोहरा शतक जमाकर खेल के इस संस्करण के साथ दर्शकों को बांधे रखने का भी काम किया है। वरना क्रिकेट खेलने वाले कई देश तो पचास ओवरों के क्रिकेट से मुंह मोड़ने लगे थे। इंग्लैंड ने तो अपने घरेलू क्रिकेट के फारमेट से इसे विदाई दे ही दी है। आस्ट्रेलिया में भी पूरे सत्र भर ट्वंटी-ट्वंटी क्रिकेट खेला जाने लगा है। क्रिकेट को दुनिया के अन्य देशों में लोकप्रिय बनाने के लिए आईसीसी ने कम ओवरों के मैच, रिटायरमेंट ले चुके या टीम से बाहर चल रहे नामी खिलाड़ियों को भेजकर उन देशों में खेलने की शुरुआत की थी वह उसी के लिए जी का जंजाल बनता दिख रहा था। क्रिकेट का खेल आईसीसी के इन प्रयासों से दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय तो हुआ पर ऐसे कम ओवरों वाले मैच क्रिकेट के बड़े खिलाड़ियों वाले देशों में भी तेजी से लोकप्रिय होते चले गए। ट्वंटी-ट्वंटी वर्ल्ड कप के तुरंत बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आईपीएल के नाम से जो लीग शुरू करने की घोषणा की उसने तो आईसीसी के होश ही उड़ा दिए। पर चूंकि मामला दुनिया के सबसे धनी क्रिकेट संगठन का था आईसीसी के पास भी कसमसाकर चुप बैठने के अलावा कोई चारा नहीं था। आईसीसी को इतना बेबस मैंने अपनी याद में कभी नहीं देखा था। आईपीएल का तीसरा संस्करण फिर कुछ ही दिनों बाद शुरू होने जा रहा है। इसके लिए बनी आठ टीमों में से एक के कप्तान सचिन तेंदुलकर हैं। पिछले दो संस्करणों में उनकी टीम मुम्बई इंडियन्स कुछ खास नहीं कर पाई है, और इस बात के लिए सचिन को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था। सचिन ने इस फारमेट के लिए बनी देश की टीम से खुद को अलग कर ट्वंटी-ट्वंटी के प्रति अपनी अनिच्छा भी जाहिर कर दी थी। टेस्ट क्रिकेट में एक भी तिहरा शतक नहीं लगा पाने को लेकर कुछ आलोचक उनके सर्वकालिक महान बल्लेबाज होने को लेकर उंगलियां उठाते रहे हैं, ऐसे में क्रिकेट का जो संस्करण सचिन को सबसे ज्यादा भाता है उसमें सर्वकालिक महान बल्लेबाज कहलाने का मौका उनके पास था जो दोहरा शतक जड़कर सचिन ने पा लिया है। इस उपलब्धि के बाद समकालीन और पूर्व क्रिकेटरों समेत समीक्षकों की प्रतिक्रियाएं भी सचिन के लिए उत्साहवर्धक हैं, जो उन्हे क्रिकेट में और कुछ नया कर दिखाने को प्रेरित करेंगी। दोहरा शतक ठोंककर सचिन ने यह तो साबित कर ही दिया है कि उनमें अभी काफी क्रिकेट बाकी है। हम भी दुआ करते हैं कि अपने बेटे अर्जुन के तैयार होते तक सचिन देश के लिए क्रिकेट खेलते रहें।

No comments:
Post a Comment