Sunday, May 31, 2009

निजी एनर्जी कंपनियों को टेंसन

बिजली सबसे सस्ती छत्तीसगढ़ में
चंद्रकांत शुक्ला, रायपुर
देश में एक तरफ जहां बिजली का बेहद संकट महसूस किया जा रहा, दरो में बढ़ोत्तरी हो रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ देश का ऐसा ऊर्जा समृद्ध राज्य है, जहां दरों के मामले में आम उपभोक्ताओं से लेकर बड़े उद्योगों को राहत दी गई है।छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एसके मिश्रा ने शनिवार को नई दरें घोषित कीं। विद्युत मंडल के विखंडन के पश्चात बिजली की दरों को लेकर आम जनता में भी यह धारणा थी कि बिजली महंगी हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आयोग ने ५०० यूनिट तक खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं की दर में ५ पैसे प्रति यूनिट की कमी की है, वहीं प्रतिमाह ७०० यूनिट से अधिक खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में १० पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की है। मीटर किराए में छूट का लाभ २४ लाख घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा। १०० यूनिट तक खपत करने वाले छोटे गैर घरेलू उपभोक्ताओं (पान व किराना दुकान आदि) के लिए नया टैरिफ प्लान बनाया गया है। इसमें उन्हें पुरानी दर की तुलना में ९५ पैसे प्रति यूनिट की दर से राहत मिलेगी। ५०० यूनिट तक प्रतिमाह खपत करने वाले गैर घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में ४५ पैसे प्रति यूनिट व इससे अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं की विद्युत दर में २५ पैसे प्रति यूनिट की कमी की गई है। कृषि पंपों की विद्युत दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। नई दरों में छोटे औद्योगिक उपभोक्ता जैसे आटाचक्की, हालर व आरा मिल चलाने वालों को राहत दी गई है। सीमेंट व स्टील उद्योगों को छोड़कर मल्टीस्टोरी फ्लैट, हास्पिटल, कॉलेज, शासकीय कार्यालय और कम लोड फैक्टर वाले उद्योगों को (दिन में चलने वाले) १० पैसे प्रति यूनिट की छूट दी गई है। उच्चदाब स्टील उद्योगों को लोड फेक्टर इंसेंटिव में १० पैसे प्रति यूनिट की छूट दी गई है। पौधरोपण, मुर्गीपालन, मत्स्य उद्योग, डेयरी, टिशुकल्चर, बायो टेक्नोलॉजी व सेरीकल्चर आदि के लिए रियायती दरें लागू की गई हैं। अब अस्थायी कनेक्शन के लिए एक साल के बजाय तीन महीने का बिल जमा करना होगा। बिजली बिल का अग्रिम भुगतान करने पर पांच फीसदी की दर से अग्रिम राशि में छूट दी जाएगी। अब बिजली बिल एक रुपए के स्थान पर १० के गुणांक में जारी किए जाएंगे। वार्षिक आवश्यकता से अधिक राजस्व होने के कारण टैरिफ स्टेबलाइजेशन फंड का प्रावधान किया गया है। इससे वर्तमान बिजली की दरों को भविष्य में स्थिर रखा जा सकेगा। नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री मिश्रा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मीटर की जांच करने पहुंचे अफसर पूरे घर में घुसकर जांच नहीं कर सकते। मीटर लगने से पूर्व ही औसत खपत जानने के लिए घर का निरीक्षण किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मीटर लगने में देरी या अन्य शिकायतें आम जनता आयोग से कर सकती हैं और आयोग त्वरित कार्रवाई करेगी।
फिर भी १०५ करोड़ का फायदा
विद्युत उत्पादन कंपनी ने २०१९ करोड़ की राजस्व आवश्यकता बताई थी, वहीं विद्युत पारेषण कंपनी ने २८३ करोड़ रुपए राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव रखा था, जबकि वितरण कंपनी ने ४४६० करोड़ रुपए राजस्व आवश्यकता का आकलन किया था। वितरण कंपनी ने कहा था कि प्रचलित टैरिफ के आधार पर कंपनी को अपेक्षित आय में ८२५ करोड़ का घाटा होगा। वितरण कंपनी ने नई दरों में २२।६९ फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। आयोग ने प्रस्तावों का परीक्षण करने के बाद पाया कि वितरण कंपनी को ३६८२ करोड़ रुपए राजस्व की आवश्यकता है। इस लिहाज से भी १०५ करोड़ अधिक राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है, चंकि राजस्व घाटा नहीं है, इसलिए टैरिफ नहीं बढ़ाया गया।

1 comment:

  1. ब्लागिंग के इस नशा जगत में आपका स्वागत है शुक्ला जी, अगर आप भी ब्लागिंग का नशा करेंगे तो सारे नशे भूल जाएँगे। आईये मिलकर करें इस ब्लागिंग का नशा।
    हमको तो नशा है ब्लागिंग का जनाब ...

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